IRDAI Fined Policybazaar : भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने हाल ही में ऑनलाइन बीमा प्लेटफॉर्म पॉलिसीबाजार (Policybazaar Insurance Brokers Pvt Ltd) पर 5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना बीमा अधिनियम, 1938 और IRDAI (इंश्योरेंस वेब एग्रीगेटर्स) नियम, 2017 के उल्लंघन के कारण लगाया गया है। यह कार्रवाई 1 से 5 जून, 2020 को की गई जांच के आधार पर हुई, जिसके बाद अक्टूबर 2024 में पॉलिसीबाजार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इस लेख में हम इस जुर्माने के कारणों और इससे जुड़े सभी महत्वपूर्ण तथ्यों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
पॉलिसीबाजार पर जुर्माना लगने के प्रमुख कारण
IRDAI ने अपनी 34 पेज की रिपोर्ट में पॉलिसीबाजार के खिलाफ 11 अलग-अलग उल्लंघनों का उल्लेख किया है। ये उल्लंघन शासन (गवर्नेंस), उत्पाद प्रचार, प्रीमियम भुगतान में देरी, और आउटसोर्सिंग समझौतों में पारदर्शिता की कमी से संबंधित हैं। आइए, इनमें से कुछ प्रमुख कारणों को विस्तार से समझते हैं:
1. उत्पादों का पक्षपातपूर्ण प्रचार (Misleading Product Promotion)
पॉलिसीबाजार पर आरोप है कि इसने अपनी वेबसाइट पर कुछ बीमा उत्पादों को “सर्वश्रेष्ठ” या “टॉप” के रूप में प्रचारित किया, बिना इसके लिए कोई तटस्थ या तृतीय-पक्ष डेटा प्रदान किए। उदाहरण के लिए, जून 2020 की जांच में पाया गया कि पॉलिसीबाजार ने पांच ULIP (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान) उत्पादों को शीर्ष स्थान दिया था, जिनमें शामिल हैं:
- बजाज एलियांज गोल एश्योर
- एडलवाइस टोकियो वेल्थ गेन+
- एचडीएफसी क्लिक2वेल्थ
- एसबीआई लाइफ ई-वेल्थ इंश्योरेंस
- आईसीआईसीआई सिग्नेचर
इन रैंकिंग्स के पीछे कोई पारदर्शी मानदंड या डिस्क्लेमर नहीं था, जिसके कारण ग्राहकों को यह भ्रामक संदेश मिला कि ये उत्पाद अन्य की तुलना में बेहतर हैं। इस उल्लंघन के लिए पॉलिसीबाजार पर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया।
2. प्रीमियम भुगतान में देरी (Delayed Premium Remittance)
IRDAI ने पाया कि पॉलिसीबाजार ने ग्राहकों से प्राप्त प्रीमियम को बीमा कंपनियों को समय पर हस्तांतरित नहीं किया। बीमा अधिनियम की धारा 64VB के अनुसार, मध्यस्थों को प्रीमियम प्राप्त होने के 24 घंटे के भीतर इसे बीमा कंपनियों को हस्तांतरित करना अनिवार्य है। हालांकि, पॉलिसीबाजार अपने नोडल खाते और स्वयं के पेमेंट गेटवे के माध्यम से प्रीमियम को कम से कम तीन कार्यदिवसों तक रोक रहा था। कुछ मामलों में, यह देरी 30 दिनों से अधिक थी, जिसके कारण पॉलिसी जारी करने में देरी हुई और ग्राहकों को जोखिम का सामना करना पड़ा। इस उल्लंघन के लिए भी 1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया।
3. प्रमुख प्रबंधकीय कर्मियों द्वारा नियमों का उल्लंघन (Governance Lapses)
पॉलिसीबाजार के प्रमुख प्रबंधकीय कर्मियों (KMPs) और प्रधान अधिकारी (Principal Officer) ने IRDAI की पूर्व अनुमति के बिना अन्य कंपनियों में निदेशक के पद संभाले। यह बीमा नियामक के नियमों के खिलाफ है, क्योंकि इससे हितों का टकराव (Conflict of Interest) हो सकता है। इस उल्लंघन के लिए पॉलिसीबाजार पर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया।
4. आउटसोर्सिंग समझौतों में पारदर्शिता की कमी (Lack of Transparency in Outsourcing)
IRDAI ने पाया कि पॉलिसीबाजार के आउटसोर्सिंग समझौतों में स्पष्टता की कमी थी। कंपनी ने बीमा कंपनियों के साथ प्रति सीट के आधार पर भुगतान की व्यवस्था की थी, जो वास्तविक सेवा प्रदान करने से जुड़ा नहीं था। उदाहरण के लिए, 2019-20 में पॉलिसीबाजार ने आउटसोर्सिंग शुल्क के रूप में 104.59 करोड़ रुपये प्राप्त किए, जिसमें मार्च 2020 के लिए 24.81 करोड़ रुपये का एक इनवॉइस शामिल था। इस तरह की प्रथाओं को अनुचित और अपारदर्शी माना गया, जिसके लिए कंपनी को चेतावनी दी गई।
5. अन्य उल्लंघन
- कमीशन की सीमा से अधिक भुगतान: पॉलिसीबाजार ने कुछ मामलों में स्वास्थ्य बीमा के लिए निर्धारित 15% कमीशन की सीमा से अधिक भुगतान प्राप्त किया।
- कॉल रिकॉर्डिंग में कमी: कंपनी कुछ कॉल रिकॉर्डिंग प्रदान करने में असमर्थ रही, जिसके लिए IRDAI ने चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा बाहरी ऑडिट का आदेश दिया।
- प्रमाणित सत्यापनकर्ताओं (Authorized Verifiers) की कमी: कई पॉलिसी बिक्री को अधिकृत सत्यापनकर्ताओं से जोड़ा नहीं गया, जिससे बिक्री प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठे।
IRDAI का आदेश और पॉलिसीबाजार की प्रतिक्रिया
IRDAI ने 4 अगस्त, 2025 को अपने आदेश में पॉलिसीबाजार को 45 दिनों के भीतर 5 करोड़ रुपये का जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया। इसके अलावा, कंपनी को 90 दिनों के भीतर सुधारात्मक कार्रवाई का विवरण (Action Taken Report) प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। पॉलिसीबाजार की मूल कंपनी, PB Fintech Ltd, ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में इस कार्रवाई की पुष्टि की और कहा कि यह मामला अगली बोर्ड बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस जुर्माने का उसके संचालन या अन्य गतिविधियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
Policybazaar के लिए इसका क्या अर्थ है?
पॉलिसीबाजार, जो 2008 में स्थापित हुआ और अब तक 4.2 करोड़ से अधिक पॉलिसी बेच चुका है, भारत का एक प्रमुख ऑनलाइन बीमा एग्रीगेटर है। इस जुर्माने ने डिजिटल बीमा मध्यस्थों के लिए नियामक अनुपालन के महत्व को रेखांकित किया है। IRDAI की इस कार्रवाई को बीमा क्षेत्र में पारदर्शिता और उपभोक्ता संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक सख्त कदम माना जा रहा है।
पॉलिसीबाजार के पास इस आदेश के खिलाफ सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) में अपील करने का विकल्प है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। इस बीच, PB Fintech के शेयरों में 2-3% की गिरावट देखी गई, जो इस खबर के बाद बाजार की प्रतिक्रिया को दर्शाता है।
उपभोक्ताओं के लिए सबक
यह घटना उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है कि ऑनलाइन बीमा प्लेटफॉर्म का उपयोग करते समय सतर्कता बरतनी चाहिए। बीमा उत्पादों की तुलना करते समय, उपभोक्ताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्लेटफॉर्म द्वारा दी गई जानकारी तटस्थ और पारदर्शी हो। साथ ही, बीमा पॉलिसी खरीदने से पहले उसके नियम और शर्तों को ध्यान से पढ़ना चाहिए।
IRDAI द्वारा पॉलिसीबाजार पर लगाया गया 5 करोड़ रुपये का जुर्माना बीमा क्षेत्र में नियामक अनुपालन की आवश्यकता को दर्शाता है। पक्षपातपूर्ण प्रचार, प्रीमियम भुगतान में देरी, और शासन में खामियों जैसे उल्लंघनों ने कंपनी को इस स्थिति में ला खड़ा किया। यह कार्रवाई न केवल पॉलिसीबाजार के लिए, बल्कि अन्य डिजिटल बीमा मध्यस्थों के लिए भी एक चेतावनी है कि वे उपभोक्ता हितों और नियामक मानकों का पालन करें।
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