GST Council Meeting : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित GST काउंसिल की 56वीं बैठक का पहला दिन 3 सितंबर 2025 को समाप्त हुआ। इस दो दिवसीय बैठक (3 और 4 सितंबर) में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिनमें टैक्स स्लैब को सरल करने और उपभोक्ताओं को राहत देने पर जोर रहा।
GST Council Meeting मे टैक्स स्लैब हुए बदलाव
GST काउंसिल ने 12% और 18% टैक्स स्लैब को खत्म करने का फैसला किया है। अब केवल दो टैक्स स्लैब—5% और 18%—लागू होंगे। सूत्रों के हवाले से इस कदम का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को और सरल बनाना है। इससे उपभोक्ताओं और व्यापारियों दोनों को फायदा होने की उम्मीद है।
जीएसटी सुधार क्यों जरूरी था ?
15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2017 में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) लागू होने के बाद भारत के सबसे बड़े अप्रत्यक्ष कर सुधार की घोषणा की थी । इसके कुछ दिनों बाद ही भारतीय शेयर बाजार में तेजी देखी गई, लेकिन जब अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लागू किया, तो बाजार मे गिरावट देखी गई ।
वास्तव में, जीएसटी सुधार अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर लगाए गए टैरिफ के आर्थिक झटके को कम करने का एक कवच हैं। एसबीआई रिसर्च के अनुसार, अगले 12 महीनों में जीएसटी सुधार अकेले भारत के जीडीपी में 60 बेसिस पॉइंट्स का इजाफा कर सकते हैं, जबकि अमेरिकी टैरिफ लंबे समय में विकास को 1 प्रतिशत तक प्रभावित कर सकता हैं। ध्यान दें: एक बेसिस पॉइंट प्रतिशत का सौवां हिस्सा होता है।
एसबीआई के ग्रुप मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्या कांति घोष ने 19 अगस्त को जारी ‘जीएसटी 2.0 ( GST 2.0 )’ रिपोर्ट में कहा था , “अगर काउंसिल 12% से 5% तक व्यापक बदलाव और 28% को 18%/40% में तर्कसंगत विभाजन लाती है, तो जीएसटी सुधार अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को आधे से लेकर लगभग पूरी तरह से कम कर सकते हैं। अगर टैरिफ सख्त या लंबे समय तक लागू रहते हैं, तो यह प्रभाव 1 प्रतिशत तक हो सकता है—जीएसटी मदद करेगा, लेकिन उस स्थिति में इसे पूरी तरह से खत्म नहीं कर पाएगा।”
एसबीआई का अनुमान है कि औसत जीएसटी दर 9.5% तक गिर जाएगी, जिससे खुदरा मुद्रास्फीति 20-25 बेसिस पॉइंट्स कम होगी और उपभोग बढ़ेगा। इससे मासिक जीएसटी संग्रह में भी वृद्धि होगी।
फुटवियर और कपड़ों पर टैक्स में राहत
बैठक में फुटवियर और कपड़ों पर टैक्स को लेकर भी अहम फैसला लिया गया। पहले 1,000 रुपये तक के फुटवियर और कपड़ों पर 5% GST लागू था, जबकि इससे ऊपर के सामान पर 12% टैक्स लगता था। अब काउंसिल ने 5% टैक्स की सीमा को बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया है। इसका मतलब है कि 2,500 रुपये तक के कपड़े और जूते अब सस्ते हो सकते हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
New GST Rates : नई पीढ़ी का जीएसटी सुधार सारणी
दैनिक आवश्यक वस्तुओं पर बड़ी बचत
| वस्तुएं | से | तक |
| हेयर ऑयल, शैंपू, टूथपेस्ट, टॉयलेट साबुन | 18% | 5% |
| बार साबुन, टूथब्रश, शेविंग क्रीम | 18% | 5% |
| मक्खन, घी, चीज़ और डेयरी स्प्रेड | 12% | 5% |
| प्री-पैकेज्ड नमकीन, भुजिया और मिश्रण | 12% | 5% |
| फीडिंग बोतलें, नैपकिन्स (बच्चों के लिए) और क्लीनिकल डायपर्स | 12% | 5% |
| सिलाई मशीनें और पार्ट्स | 12% | 5% |
किसानों और कृषि को प्रोत्साहन
| वस्तुएं | से | तक |
| ट्रैक्टर टायर्स और पार्ट्स | 18% | 5% |
| ट्रैक्टर्स | 12% | 5% |
| बायो-पेस्टिसाइड्स, माइक्रो न्यूट्रिएंट्स | 12% | 5% |
| ड्रिप सिंचाई सिस्टम और स्प्रिंकलर्स | 12% | 5% |
| मशीनरी (मिट्टी की तैयारी, वानिकी, कटाई और मंथन के लिए) | 12% | 5% |
स्वास्थ्य क्षेत्र में राहत
| वस्तुएं | से | तक |
| व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा | 18% | शून्य |
| थर्मामीटर | 12% | 5% |
| मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन | 12% | 5% |
| सभी डायग्नोस्टिक किट और रिएजेंट्स | 12% | 5% |
| ग्लूकोमीटर और टेस्ट स्ट्रिप्स | 12% | 5% |
| सुधारक चश्मे | 12% | 5% |
वाहन हुए सस्ते
| वस्तुएं | से | तक |
| पेट्रोल और डीजल हाइब्रिड, LPG, CNG कार्स (1200 cc से 4000mm तक, नॉन-एक्सीडिंग) | 28% | 18% |
| डीजल और पेट्रोल कार्स (1500 cc से 4000mm तक, नॉन-एक्सीडिंग) | 28% | 18% |
| 3 पहिया वाहन | 28% | 18% |
| मोटर साइकिल (350 cc से नीचे) | 28% | 18% |
| माल परिवहन के लिए वाहन | 28% | 18% |
सस्ती शिक्षा
| वस्तुएं | से | तक |
| मानचित्र, चार्ट और ग्लोब | 12% | शून्य |
| पेंसिल, शार्पनर, क्रेयॉन्स | 12% | शून्य |
| व्यायाम पुस्तकें और नोटबुक | 12% | शून्य |
| रबर | 5% | शून्य |
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर बचत
| वस्तुएं | से | तक |
| एयर कंडीशनर | 28% | 18% |
| टेलीविजन (LED और LCD TV) | 28% | 18% |
| मॉनिटर और प्रोजेक्टर | 28% | 18% |
| डिश वाशिंग मशीन | 28% | 18% |
प्रधानमंत्री का संदेश
“नई पीढ़ी का जीएसटी सुधार हर भारतीय के लिए दिवाली का तोहफा है। करों में भारी कमी आएगी, MSMEs और छोटे उद्यमी लाभान्वित होंगे, और रोजमर्रा की वस्तुएं सस्ती होंगी।”
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