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IPO में GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) क्या है ?

What is GMP in IPO in Hindi

आईपीओ (इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग) किसी कंपनी द्वारा अपने शेयरों को पहली बार पब्लिक के लिए जारी करने की प्रक्रिया है। जब कोई कंपनी अपनी ग्रोथ और विस्तार के लिए नए फंड्स की जरूरत महसूस करती है, तो वह आईपीओ के जरिए पूंजी जुटाती है। इसके जरिए कंपनी अपने कुछ हिस्से को शेयरों के रूप में पब्लिक को बेचती है। आईपीओ जारी होने से पहले, उसका मार्केट में एक अनऑफिशियल ट्रेडिंग होती है, जिसे ग्रे मार्केट कहा जाता है। इस ग्रे मार्केट में होने वाले ट्रेडिंग के दौरान शेयरों की कीमत, जिसे ‘ग्रे मार्केट प्रीमियम’ (GMP) कहते हैं, काफी चर्चा में रहती है।

GMP गणना कैसे की जाती है, कैसे निवेशक इसका इस्तेमाल करते हैं, और इसके फायदों और नुकसान पर केंद्रित है। साथ ही हम यह जानेंगे कि GMP के आधार पर निवेश करना किस हद तक फायदेमंद हो सकता है।

आईपीओ ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) क्या है?

ग्रे मार्केट प्रीमियम उस कीमत को संदर्भित करता है जो निवेशक उस कंपनी के शेयर के लिए उसकी ऑफिशियल लिस्टिंग से पहले ऑफ मार्केट में देने के लिए तैयार होते हैं। यह एक अनऑफिशियल मार्केट होता है, जहां शेयर का प्री-लिस्टिंग ट्रेडिंग होता है। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी आईपीओ का इश्यू प्राइस 100 रुपये है, और ग्रे मार्केट में उसका प्रीमियम 20 रुपये है, तो इसका मतलब यह है कि उस शेयर को ग्रे मार्केट में 120 रुपये (100+20) पर ट्रेड किया जा रहा है।

GMP आईपीओ की संभावनाओं और डिमांड का एक संकेत होता है। अगर किसी शेयर का GMP उच्च है, तो इसका मतलब होता है कि उस कंपनी के शेयरों की बहुत ज्यादा मांग है और लोग मानते हैं कि लिस्टिंग के बाद शेयर की कीमत बढ़ सकती है। वहीं, अगर GMP कम या नेगेटिव है, तो इसका मतलब यह हो सकता है कि मार्केट में उस शेयर के प्रति आकर्षण कम है।

आईपीओ ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) का उदाहरण

मान लीजिए कि एक कंपनी “XYZ लिमिटेड” का IPO आ रहा है, जिसकी शेयर कीमत 100 रुपये प्रति शेयर है। यदि ग्रे मार्केट में इस IPO का GMP 20 रुपये है, तो इसका मतलब है कि ग्रे मार्केट में इस शेयर का संभावित मूल्य 120 रुपये हो सकता है (100 रुपये + 20 रुपये)।

यदि GMP बढ़ता है, तो इसका मतलब है कि बाजार में इस आईपीओ के प्रति अधिक रुचि है, और अगर GMP घटता है, तो इसका संकेत हो सकता है कि निवेशक इस आईपीओ के प्रति कम रुचि रख रहे हैं।

इस तरह, GMP निवेशकों को एक अतिरिक्त संकेत देता है कि उन्हें उस आईपीओ में निवेश करना चाहिए या नहीं।

आईपीओ ग्रे मार्केट प्रीमियम कैसे कैलकुलेट किया जाता है

ग्रे मार्केट प्रीमियम को किसी फॉर्मूला से कैलकुलेट नहीं किया जाता है। यह मांग और आपूर्ति पर आधारित होता है। निवेशक और ट्रेडर अपने अनुभव और पूर्वानुमान के आधार पर कीमत तय करते हैं कि वह शेयर को किस कीमत पर खरीदना या बेचना चाहते हैं। यह प्रीमियम मुख्य रूप से मार्केट की धारणा, आईपीओ की सब्सक्रिप्शन स्थिति, कंपनी की वित्तीय स्थिति, और इंडस्ट्री के पोटेंशियल पर निर्भर करता है।

उदाहरण के तौर पर, अगर कोई आईपीओ बहुत ज्यादा सब्सक्राइब हो जाता है, तो उसके शेयर की मांग बढ़ सकती है और इस स्थिति में GMP बढ़ सकता है। वहीं, अगर किसी कंपनी का पिछला प्रदर्शन या इंडस्ट्री का भविष्य बहुत स्पष्ट न हो, तो निवेशक उस शेयर को खरीदने में रुचि कम दिखा सकते हैं, जिससे GMP कम या नेगेटिव हो सकता है।

ग्रे मार्केट प्रीमियम के आधार पर निवेश कैसे करें

  1. आईपीओ की जानकारी एकत्रित करें: सबसे पहले आपको आईपीओ के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करनी होगी। कंपनी की वित्तीय स्थिति, बिजनेस मॉडल, ग्रोथ पोटेंशियल, और पिछले प्रदर्शन का विश्लेषण करें।
  2. ग्रे मार्केट प्रीमियम पर नजर रखें: जैसे ही आईपीओ की घोषणा होती है, उसका ग्रे मार्केट प्रीमियम शुरू हो जाता है। विभिन्न वित्तीय पोर्टल्स और वेबसाइट्स पर इसका अपडेट मिलता रहता है। आपको नियमित रूप से GMP की स्थिति को ट्रैक करना चाहिए।
  3. सब्सक्रिप्शन स्थिति पर ध्यान दें: आईपीओ के सब्सक्रिप्शन की स्थिति भी GMP को प्रभावित करती है। अगर क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs), रिटेल इनवेस्टर्स और हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) अधिक मात्रा में सब्सक्राइब करते हैं, तो GMP उच्च रहने की संभावना होती है।
  4. शेयर की संभावित लिस्टिंग गेन का अनुमान लगाएं: GMP के आधार पर आप लिस्टिंग गेन का अनुमान लगा सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर किसी शेयर का इश्यू प्राइस 200 रुपये है और GMP 50 रुपये है, तो आप यह उम्मीद कर सकते हैं कि लिस्टिंग के समय वह शेयर 250 रुपये के आसपास ट्रेड हो सकता है।
  5. निवेश करने का निर्णय लें: GMP के साथ-साथ आपको कंपनी के फंडामेंटल्स, इंडस्ट्री की स्थिति और अन्य फैक्टर्स पर भी विचार करना होगा। केवल GMP के आधार पर निवेश करना जोखिमपूर्ण हो सकता है। इसलिए, समझदारी से निर्णय लें और उस कंपनी में निवेश करें जिसकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो।

ग्रे मार्केट प्रीमियम का उपयोग कैसे करें

  1. लिस्टिंग गेन के लिए: निवेशक अक्सर आईपीओ में लिस्टिंग गेन के लिए निवेश करते हैं। ग्रे मार्केट प्रीमियम इस बात का संकेत हो सकता है कि लिस्टिंग के समय शेयर की कीमत कितनी बढ़ सकती है। अगर GMP उच्च है, तो निवेशक उम्मीद करते हैं कि लिस्टिंग के समय शेयर की कीमत बढ़ेगी और वह शॉर्ट-टर्म में लाभ कमा सकते हैं।
  2. लॉन्ग-टर्म निवेश के लिए नहीं: ग्रे मार्केट प्रीमियम केवल लिस्टिंग के समय की संभावनाओं का संकेत देता है, लेकिन इसका कंपनी के दीर्घकालिक प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है। लॉन्ग-टर्म निवेशकों को GMP पर ध्यान देने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल्स, बिजनेस मॉडल, और इंडस्ट्री की ग्रोथ पोटेंशियल पर विचार करना चाहिए।
  3. मार्केट सेंटीमेंट का अंदाजा लगाने के लिए: GMP यह समझने में मदद करता है कि मार्केट में उस आईपीओ को लेकर क्या सेंटीमेंट्स हैं। अगर GMP बढ़ रहा है, तो इसका मतलब है कि निवेशकों का रुझान पॉजिटिव है। वहीं, अगर यह घट रहा है, तो इसका मतलब हो सकता है कि निवेशकों का भरोसा कमजोर हो रहा है।

ग्रे मार्केट प्रीमियम के फायदे

  1. लिस्टिंग गेन की संभावना: GMP के जरिए निवेशक लिस्टिंग के समय होने वाले संभावित लाभ का अनुमान लगा सकते हैं। अगर GMP उच्च है, तो यह संकेत हो सकता है कि लिस्टिंग के समय निवेशकों को शॉर्ट-टर्म में अच्छा लाभ मिल सकता है।
  2. मार्केट की धारणा का पूर्वानुमान: GMP के आधार पर आप यह समझ सकते हैं कि मार्केट में उस शेयर के प्रति किस प्रकार की धारणा है। यह जानकारी निवेशकों को यह निर्णय लेने में मदद करती है कि उन्हें आईपीओ में आवेदन करना चाहिए या नहीं।
  3. जल्द पैसा कमाने का मौका: जिन निवेशकों को शॉर्ट-टर्म गेन की तलाश होती है, उनके लिए GMP एक अच्छा इंडिकेटर हो सकता है। वह आईपीओ में निवेश कर लिस्टिंग के समय अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

ग्रे मार्केट प्रीमियम के नुकसान

  1. गैर-नियमित (Unregulated) बाजार: ग्रे मार्केट एक अनऑफिशियल और गैर-नियमित बाजार है। इसमें होने वाले ट्रेडिंग पर सेबी (SEBI) या किसी अन्य नियामक का नियंत्रण नहीं होता है। इसलिए इसमें उच्च जोखिम होता है। अगर कुछ गलत होता है, तो निवेशक को किसी प्रकार की कानूनी सुरक्षा नहीं मिलती है।
  2. वास्तविक प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं: GMP केवल एक संकेत है, इसका कंपनी के वास्तविक प्रदर्शन से कोई सीधा संबंध नहीं होता। अगर कंपनी के फंडामेंटल्स कमजोर हैं, तो भले ही GMP उच्च हो, निवेशकों को लॉन्ग-टर्म में नुकसान हो सकता है।
  3. अत्यधिक जोखिम: ग्रे मार्केट प्रीमियम पर आधारित निवेश में अत्यधिक जोखिम होता है। यह केवल लिस्टिंग गेन का अनुमान देता है, लेकिन अगर शेयर की लिस्टिंग उम्मीद के अनुसार नहीं होती है, तो निवेशकों को नुकसान हो सकता है।
  4. गलत धारणाओं का खतरा: कभी-कभी GMP ज्यादा होने का मतलब यह नहीं होता कि कंपनी का शेयर वास्तव में अच्छा प्रदर्शन करेगा। यह केवल मार्केट सेंटिमेंट पर आधारित होता है, जो कई बार गलत भी साबित हो सकते हैं।

आईपीओ ग्रे मार्केट प्रीमियम निवेशकों के लिए लिस्टिंग के समय संभावित लाभ का एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है, लेकिन इसका उपयोग केवल शॉर्ट-टर्म निवेश के लिए किया जाना चाहिए। लॉन्ग-टर्म निवेशकों को कंपनी के फंडामेंटल्स और उसके दीर्घकालिक प्रदर्शन पर अधिक ध्यान देना चाहिए। GMP एक गैर-नियमित बाजार में होता है, इसलिए इसमें निवेश करते समय जोखिमों को ध्यान में रखना बहुत जरूरी है।

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