UPI में बड़ा बदलाव: 1 अक्टूबर से UPI Collect Request Person to Person फीचर बंद

User avatar placeholder
Written by : Mahaveer Saini

Published on : Saturday, 16 August, 2025 | 2 : Min

UPI Collect Request

UPI Collect Request Person to Person फीचर भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) द्वारा उपलब्ध काफी उपयोग किए जाने वाला फीचर है अब इसमे एक बड़ा बदलाव किया जा रहा है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने घोषणा कि है कि 1 अक्टूबर 2025 से यूपीआई का पीयर-टू-पीयर (P2P) कलेक्ट रिक्वेस्ट फीचर बंद कर दिया जाएगा। यह फैसला ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने और उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए लिया गया है।

UPI Collect Request Person to Person फीचर क्या है, कैसे काम करता है ?

UPI Collect Request फीचर उपयोगकर्ताओं को किसी अन्य व्यक्ति से पैसे मांगने की सुविधा देता है। इसकी मदद से यूजर अपने दोस्त, रिश्तेदार या किसी अन्य व्यक्ति को एक निश्चित राशि के लिए भुगतान अनुरोध भेज सकता है। प्राप्तकर्ता को केवल यूपीआई पिन डालकर अनुरोध स्वीकार करना होता है। यह फीचर छोटे-मोटे लेन-देन, जैसे दोस्तों के बीच बिल शेयर करने या छोटे व्यापारियों के लिए भुगतान लेने में बेहद लोकप्रिय था।

लेकिन हाल के दिनों में इस UPI Collect Request फीचर का दुरुपयोग बढ़ गया था। स्कैमर्स फर्जी कलेक्ट रिक्वेस्ट भेजकर उपयोगकर्ताओं को ठग रहे थे। एनपीसीआई के अनुसार, UPI Collect Request फीचर को बंद करने से साइबर धोखाधड़ी में कमी आएगी।

क्यों लिया गया यह फैसला?

एनपीसीआई ने बताया कि बढ़ते साइबर अपराध इस फैसले का मुख्य कारण हैं। धोखेबाज फर्जी यूपीआई अनुरोध भेजकर उपयोगकर्ताओं को भ्रामक संदेशों के जरिए पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते थे। कई बार उपयोगकर्ता जल्दबाजी में ऐसी रिक्वेस्ट को स्वीकार कर लेते थे, जिससे उनके खाते से पैसे कट जाते थे।

एनपीसीआई के एक प्रवक्ता ने कहा, “हम यूपीआई को और सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। UPI Collect Request फीचर का दुरुपयोग रोकने के लिए इसे बंद करना जरूरी हो गया था।”

उपयोगकर्ताओं और व्यापारियों पर क्या रहेगा असर?

  • आम उपयोगकर्ता: जिन लोगों ने दोस्तों या रिश्तेदारों से पैसे मांगने के लिए कलेक्ट रिक्वेस्ट फीचर का इस्तेमाल किया, उन्हें अब डायरेक्ट पेमेंट या अन्य तरीकों पर निर्भर रहना होगा। उदाहरण के लिए, आप अपनी यूपीआई आईडी या क्यूआर कोड शेयर कर सकते हैं।
  • छोटे व्यापारी: स्थानीय दुकानदार या फ्रीलांसर, जो इस फीचर का उपयोग करते थे, अब क्यूआर कोड या डायरेक्ट यूपीआई ट्रांसफर पर ध्यान दे सकते हैं। एनपीसीआई ने स्पष्ट किया कि डायरेक्ट पेमेंट फीचर पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
  • सुरक्षा में बढ़ोतरी: इस बदलाव से फर्जी अनुरोधों की संख्या में कमी आएगी, जिससे यूपीआई उपयोगकर्ताओं का भरोसा और बढ़ेगा।

वैकल्पिक तरीके क्या है ?

कलेक्ट रिक्वेस्ट फीचर के बंद होने के बाद उपयोगकर्ता निम्नलिखित विकल्प आजमा सकते हैं:

  • यूपीआई डायरेक्ट पेमेंट: अपनी यूपीआई आईडी या क्यूआर कोड शेयर कर भुगतान प्राप्त करें।
  • थर्ड-पार्टी ऐप्स: गूगल पे, फोनपे जैसे ऐप्स अपने भुगतान अनुरोध फीचर प्रदान करते हैं।
  • बैंकिंग ऐप्स: कई बैंक अपने ऐप्स में यूपीआई के अलावा अन्य भुगतान अनुरोध सुविधाएं देते हैं।

एनपीसीआई का यह कदम डिजिटल भुगतान को और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में एनपीसीआई ऐसी तकनीकों पर काम कर सकता है, जो कलेक्ट रिक्वेस्ट जैसे फीचर्स को और सुरक्षित तरीके से वापस ला सकें। बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और दो-स्तरीय प्रमाणीकरण जैसे उपाय इस दिशा में मददगार हो सकते हैं।

यूपीआई का कलेक्ट रिक्वेस्ट फीचर भले ही बंद हो रहा हो, लेकिन यह कदम डिजिटल भुगतान को और भरोसेमंद बनाने के लिए उठाया गया है। उपयोगकर्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे वैकल्पिक तरीकों का उपयोग करें और अपने यूपीआई लेन-देन में सावधानी बरतें। क्या आप इस बदलाव से प्रभावित होंगे? अपनी राय हमें कमेंट में बताएं!

यह भी पढे : Toll FASTag Annual Pass: नितिन गडकरी के नेतृत्व में NHAI का तोहफा

Image placeholder

Mahaveer Saini

आप सभी का InbestShare वेबसाइट पर हार्दिक स्वागत है। InbestShare का अर्थ है – "शेयरिंग में बेस्ट"। इस प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से मैं भारतीय स्टॉक मार्केट, बिज़नेस, और पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ आपसे साझा करता हूँ। मेरा उद्देश्य है लोगों को आर्थिक रूप से जागरूक बनाना और वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देना, ताकि हर व्यक्ति समझदारी से अपने पैसे का प्रबंधन कर सके और एक सुरक्षित आर्थिक भविष्य की ओर बढ़ सके। मैं एक फाइनेंस एनालिस्ट और इन्वेस्टर, पिछले 5 वर्षों से मार्केट की गहराई से अध्ययन कर रहा हूँ और मेरा प्रयास है कि आम लोगों तक सरल भाषा में जटिल आर्थिक विषयों को पहुँचाया जाए।